एक बच्चे की तरह खुश रहो

    दुनिया के रचियता ने हमारी रचना की I हम एक बच्चे के रूप में इस दुनिया में आते है I बच्चा हर पल खुश रहता है ,सबके लिए प्यारा होता है और सब उसको प्यार करते है I तब तक इस दुनिया में उसका कोई ख़ास रोल नहीं होता I वो बस एक प्यारा सा बेटा या बेटी होता है ,जिसके माँ बाप उसको मालिक की दी हुई दौलत के रूप में स्वीकार करते है और उसको प्यार करते है I उस बच्चे को कुछ भी तनाव या दुःख का पता नहीं होता ,बस वो अपनी धुन में बड़ा होता चला जाता है I


मुश्किल तब शुरू होती है जब बड़ा होने के बाद दुनिया में उसके कुछ रोल या भूमिकाएं शुरू हो जाती है I वो पति ,बाप ,बेटा , नौकरी में नौकर या अपने अपने काम का मालिक ,इस तरह कई तरह की भूमिकाएं अदा करने लग जाता है I इन भूमिकाओं को निभाते हुए ही वो कई तरह से दुःख महसूस करता है और भूल जाता है कि वो मालिक का बनाया एक आदमी और औरत है ,उसको बस इसी तथ्य पर हर पल दुःख की बातों से बेअसर और खुश रहना चाहिए I लेकिन ऐसा नहीं होता I

इस सांसारिक मंच पर हर तरह की भूमिकाएं निभाते हुए हमें दूसरों के द्वारा किसी भी हालत में अपने आप को दुखी हालत में नहीं पहुँचने देना चाहिए I एक पति,या पत्नी,या भाई,बहन,माँ ,बाप ,दोस्त,और कोई रिश्तेदार या नौकर ,हम किसी भी भूमिका में हो तो हमें अपने आप पर पूरा भरोसा होना चाहिए कि हम अपनी भूमिका तो बिल्कुल सही निभा रहे है I और हमारी जिंदगी में भूमिका निभाने वाला कोई दूसरा अगर कुछ अजीब या गलत व्यवहार हमारे साथ करता है तो हमें बिना दुःख किये ये समझ लेना चाहिए कि उसकी भूमिका ऐसी ही है या वो ऐसा ही है I तब ही हम तनाव मुक्त रह सकते है I




काम करने या नौकरी करने के पीछे असली मकसद होता है ,जिंदगी जीने के लिए पैसा कमाना I फिर उसमे रुतबा या पोस्ट ऊपर ,नीचे हो जाए या काम में वर्चस्व कम ज्यादा हो जाए तो हमारा अहम हमें बुरी तरह से दुखी कर देता है I जबकि पैसा तो हम कमा ही रहे है ,मकसद तो पूरा हो ही रहा है लेकिन  हमारा “मैं” या अहम हमें दुखी कर देता है I इस “मैं ” की भावना को ख़तम करना भी जिंदगी को दुखों से मुक्त करता है I ठीक इसी तरह हमने कदम कदम पर अपने लिए दुःख बनाने के कारखाने खोल रखे है , जो मालिक की नज़र में हमारी बहुत बड़ी मूर्खता है I

इस दुनियावी मंच पर हर प्राणी अपनी भूमिका वैसे ही निभा रहा है ,जैसा वो अपनी रचना के बाद अपने आप को ढाल पाया है I दूसरों के साथ हमारे जो रोल या भूमिका को अच्छी तरह से निभा दो I दूसरा किस तरह से व्यवहार कर रहा है ,उसको गंभीरता से मत लो, ना ही अहम नाम की चीज रखो ,जिस पर चोट लगे  बल्कि उसकी भूमिका ही समझो ,दूसरे ने  जिस तरह के रोल का अभ्यास किया है वो ही निभाएगा I उसकी भूमिका पर सवाल मत उठाओ ,तो दुःख या तनाव हमारे पास भी नहीं आएगा I कितनी अजीब बात है कि हम हमेशा दूसरों के द्वारा अपने आपको दुखी होने देते है और इस अनमोल जिन्दगी का आनंद और शान्ति ख़तम करते हैI




हम अपने अन्दर नहीं झांकते कि दुनिया के रचियता ने हमें एक प्यारे से, खुश रहने वाले ,हर तरह से तनावमुक्त बच्चे के रूप में हमारी रचना की और वो ही हमारे अन्दर छुपा हुआ है I अपने चारों तरफ के लोगों या माहोल की दुखी करने वाली बातों से बेअसर रह कर हमें अपनी भूमिका सही तरह से निभाने पर ध्यान देना है I शर्त ये है कि हमें बिल्कुल भरोसा होना चाहिए कि हम खुद जो निर्णय ले रहे है या काम कर रहे है ,वो सही है I फिर कोई क्या ,कैसे कर रहा है ये हमारे लिए दुःख की बात नहीं है I मालिक की दी हुई अनमोल जिन्दगी को शांति से और तनावमुक्त रह कर गुजारना ही उसका सम्मान है I

“Häβëëβ”




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