क्षमा करने वाले असली वीर है

                                         क्षमा करने वाले असली वीर है क्योंकि क्षमा करने वाले व्यक्ति के लिए माफी एक “दिव्य” कार्य है। अगर हम दूसरों को माफ कर सकते हैं तो सुनिश्चित है कि हम दिव्य आनंद महसूस कर सकते हैं। माफी का मतलब यह नहीं है कि आपको किसी दूसरे के व्यवहार को स्वीकार करना है और न ही इसका मतलब है कि हमें भूलना है। इसका मतलब है कि हम सबकुछ दरकिनार करके खुद को खुश होने और आगे बढ़ने की अनुमति देते है  – क्योंकि यह हमारे लिए सबसे अच्छा है! अपनी गलती पर माफ़ी मांगने वाला और उसको माफ़ करने वाला दोनों ही बहादुर है I असली मर्दानगी ,गुस्से को नियंत्रित करके माफ़ कर देने में है I इस तरीके से ही हम तनावमुक्त और शांति से रह सकते है I हम तनावग्रस्त क्यों रहते है




माफी का महत्व-

गफ्फार , ईश्वर के बहुत से नामों में से एक नाम है। इसका मतलब है, जो क्षमा करता है। अगर हम प्रेम कर सकते है और  माफ कर सकते हैं, तो फिर शांति के लिए किसी और चीज की जरुरत नहीं रह जाती। अगर हम क्षमा नहीं कर सकते हैं, तो हम प्यार नहीं कर सकते; अगर हम प्यार नहीं कर सकते हैं, तो हम क्षमा नहीं कर सकते हैं। केवल महान प्रेम जानता है कि कैसे माफ करना है, और केवल महान क्षमा का गुण ही जानता है कि कैसे प्यार करना है, अन्यथा सभी की सीमाएं हैं। हर कोई गलती करता है; “गलती करना मानव का स्वभाव है और क्षमा एक दिव्य और रूहानी गुण है I  और जितना अधिक हम क्षमा करेंगे, उतना ही हम दिव्य की ओर बढ़ना शुरू करेंगे I हम मानवता से गहराई से जुड़ना शुरू करते हैं। और जितना अधिक हम मानवता के करीब  पहुंचते हैं, उतना ही प्यार संभव हो जाता है। अपने दुश्मनों को छोड़ दो, क्योंकि वे दुश्मन नहीं हैं। हम एक दूसरे से जुड़े हुए है ; हम सब मिल कर ही ईश्वर की एक रचना बनते है और याद रखें: जो क्षमा करता है , वही ईश्वर की क्षमा का हकदार ज्यादा बन सकता है I

गलतियाँ करना मानव जीवन का ही हिस्सा है 

ईश्वर ने इंसान को बुद्धि दी है। बुद्धि जिम्मेदारी लेती है। एक व्यक्ति के जितना अधिक बुद्धि है, उतना ही वह ज़िम्मेदार है। जब बुद्धि गुम हो जाती है, तो ज़िम्मेदारी भी नहीं होती है। छोटे बच्चे जिम्मेदार नहीं होते हैं, क्योंकि उनकी बुद्धि अभी तक विकसित नहीं हुई है। पागल जिम्मेदार नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने बौद्धिक क्षमता खो दी है। हालांकि, इंसान होने का हिस्सा यह भी है कि हम गलतियां करते हैं। कभी-कभी हम विचार-विमर्श और इरादे के बिना गलतियां करते हैं। लेकिन कभी-कभी हम जानबूझकर पाप करते हैं और दूसरों के लिए गलत करते हैं। मानव … गलतियों से भरा हैI   इंसान गलतियों का पुतला

यह कहा जाता है: “गलती करना इंसान की आदत है और माफ करना दैवीय या रूहानी गुण है।” इस कथन के दोनों भाग बहुत सच हैं। मनुष्य के रूप में हम जिम्मेदार होते हैं, लेकिन हम गलतियां भी करते हैं और हमें लगातार माफी की आवश्यकता होती है .1) ईश्वर से  क्षमा, 2) मानव से क्षमा। हमें दोनों की जरूरत है, क्योंकि गुनाह करके हम जिस तरह से मालिक के साथ अपने संबध ख़राब करते है वैसे ही हम इंसानों के साथ भी करते है I




क्षमा की शक्ति-

माफ करने की गुणवत्ता और क्षमता मानव की आत्मा के सबसे खूबसूरत फूलों में से एक है। लेकिन बदले की भावना बदसूरत है, मतलब, बदले की भावना इंसान को नीचे गिराती है। क्षमा करने के लिए इतना ऊंचा उठना है। जितना अधिक क्षमा करने में सक्षम हो जाता है, उतना ही दिल बढ़ता है, उतनी ही चेतना बड़ी हो जाती है। जिस दिन कोई सब माफ करने के काबिल बन जाता है तो उसका ईश्वर से मिलने के काबिल किरदार बन जाता है I
तो क्षमा की यह गुणवत्ता आपका केंद्र बनने दें। इस अर्थ में क्षमा न करें कि आप बाध्य हैं,या ये कर्तव्य है। इसलिए भी क्षमा ना करें कि आप महात्मा या आलिम है ,इसलिए दुसरे को क्षमा करना ही पड़ेगा, क्योंकि तब यह अहंकार है , और एक बहुत सूक्ष्म अहंकार बनाता है, जो खतरनाक है, बदला लेने से ज्यादा खतरनाक है। अहंकार दुनिया में सबसे बुरी चीज है। इसे आसानी से ले लो; क्षमा करने के लिए स्वाभाविक रूप से आना चाहिए, और फिर यह वास्तव में एक बड़ी नैमत होगा। इंसान का सबसे गिरा हुआ गुण अहंकार ही तो है जो माफ़ी मांगने और माफ़ करने से रोकता है I अहंकार से दूर एक बच्चे की तरह खुश रहो

माफ़ करना एक रूहानी और दिव्य गुण है –

सभी धर्मों के अपने अपने सिद्धांत है , गुनाह या पाप की परिभाषा बताने के लिए , फिर आपको एक सरल विधि के द्वारा पापों से बचने के लिए ,मुक्ति के लिए। बहुत ही सरल है I यदि आपने कुछ गलत किया है, तो उस व्यक्ति के पास जाओ। विनम्र रहो, उसकी क्षमा मांगो। केवल वह आपको क्षमा कर सकता है, कोई और नहीं।
क्षमा करना दिव्य है , इसलिए यदि कोई आपके पास आता है और कहता है कि उसने आपके खिलाफ गलती की है,तो ईश्वरीय रूहानी गुण के स्वाद का मज़ा चखने का अवसर हाथ से मत जाने दो, गले से लगा कर क्षमा करदो I इसी तरह अगर आप माफ़ी मांगने के लिए दुसरे के पास जाते है तो  उसे दिव्य का कुछ स्वाद लेने का एक बड़ा मौका दे रहे हैं। यह आप दोनों के लिए अच्छा है। क्षमा करके, वह कुछ ऐसा स्वाद लेता है ,जिसकी व्याख्या करना असंभव है; इसे केवल दिव्य या रूहानी कहा जा सकता है। और आप कुछ जबरदस्त खूबसूरत महसूस करेंगे I
दूसरों को माफ कर दो और दिव्य का आनंद लें

                                                                       “Häβëëβ”





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