खुश रहने का सच्चा रहस्य

true happiness

हर पल खुश कैसे रहें 

 मानव की शक्ति-

                                 खुश रहने का सच्चा रहस्य I ईश्वर ने मानव को सर्वगुणसंपन्न बनाया ,फिर भी इंसान को खुश रहने के लिए लाख कोशिशें क्यों करनी पड़ती है ? सबसे बड़ी समस्या ये है कि हम प्रसन्नता तलाश करते है दूसरी चीज़ों में I उनमें से कोई भी चीज़ कम होते ही हम दुखी हो जाते है I दूसरी चीज़ों का क्या , वो तो कभी भी हमारे जीवन में आ सकती है और जा भी सकती है I हमने अपने जीवन की ख़ुशी या प्रसन्नता को उन पर निर्भर क्यों किया ? अनमोल जीवन हर पल आनंदमय होना चाहिए , फिर बार बार दुखी इसलिए होते है कि हमने हमारी ख़ुशी को दूसरी चीज़ों या दुसरे रिश्तेदारों पर निर्भर कर दिया I हम ईश्वरीय रचना है , आइये विचार करते है कि ख़ुशी भरा जीवन कैसे जियें



खुशी हमारे अन्दर छुपी है-

                                  एक आदमी था I वो अपने जीवन में हर पल खुश और आनंदित रहता था I कई वर्षों तक लोगों ने उसको हर पल खुश देखा तो एक दिन उसको पूछा कि आपके खुश रहने का राज क्या है I तो उस आदमी ने ज़वाब दिया कि मैं रोजाना सुबह जब जागता हूँ तो सबसे पहले अपने आप से एक सवाल पूछता हूँ कि क्या मैं आज के दिन को अपने जीवन के लिए श्राप बनादूँ जिसमे निराशा,तनाव दुःख शामिल हो या आनंद से भरपूर बना दूँ , तो मैं आनंद का चयन ही करता हूँ और पूरे दिन आनंदमय रहता हूँ I मुझे कोई मेरे शरीर से बाहरी चीज दुखी नहीं कर सकती I तो हम समझ सकते है कि खुशी या आनंद हमारे अन्दर निहित है और हमारी इच्छाशक्ति के नियंत्रण में है I

कौनसी बातें खुशियों को बाधित करती है-

ईश्वर ने सबसे पहले प्रकृति को बनाया फिर हमें बनाया I हमारी समस्या ये है कि हम अपने आप को “मैं ” मानते है I प्रकृति और ईश्वर से अलग हमने अपना अस्तित्व बना रखा है I “मैं ” प्रकृति और ईश्वर से अलग होकर खुश कैसे रहेगा ? ईश्वर ,प्रकृति और मानव एक ही मिश्रण है I जैसे सुहानी हवा अपनी  प्रकृति के अनुसार चल रही है ,पक्षी कलरव कर रहे है I यदि हम अपने आपको प्रकृति के साथ आत्मसात करके रखेंगे तो हम पृकृति कि हर अदा से, हर घटना से आनंद का अनुभव ही करेंगे I पेड़ों के नीचे से गुजरते हुए एक लम्बी सांस लो ,उसमें भी आनंद का अनुभव है I ईश्वर की प्रकृति ,हम,ईश्वर के सबकुछ एक ही मिश्रण है I हम धन की कामना करके, सुन्दर स्त्री भोग की कामना करके अपने आपको तनावग्रस्त बनाते है I हम भी पेड़ पोधों की तरह ईश्वर की प्रकृति का एक हिस्सा है,जो जितने दिन रहते है आनंद से लहलहाते है और एक दिन समाप्त हो जाते है I क्यों हम अपने जीवन के एक पल को भी तनावग्रस्त बनाते है ? किसी सुन्दर स्त्री को देखो तो ईश्वर की इस प्राकृतिक सुन्दरता का सम्मान अनुभव करते हुए आनंदमय अनुभव करो ना कि उसको भोगने का विचार दिल में लाओ ,जो दिमाग में हिंसा और तनाव पैदा करता है I



सच्ची धन-दौलत क्या है?

ये सोचना गलत है कि केवल धन से जीवन में आनंद आता है I आप धनवानों पर गौर करने की कोशिश करो , क्या उनको आत्मिक और पूर्ण आनंद प्राप्त है ? पूर्ण आनंद ईश्वर की प्रकृति में आत्मसात होने में और उसको स्वीकार करने में है I यदि हमारे पास कम धन है तो हो सकता है ईश्वर ने हमारी प्रकृति ऐसी ही बनाई है I हमें इसी हाल में आनंदमयी रहना है I धन की कामना बहुत तनाव और हिंसा की जनक है I “मैं “को समाप्त करो , सुन्दर प्रकृति का ही एक भाग बन कर हर पल आनंदमय रहो I आप प्रसन्न रहते है तो कोई आप को नहीं रोक सकता कि आप प्रसन्न क्यों है यदि कोई बाहरी चीज आपको प्रभावित ना करती हो I

हम किसी भी प्राकृतिक घटना को नहीं रोक सकते-

यदि हम “मैं ” को बनाए रखते है तो वो कई बातों से दुखी और तनावग्रस्त हो सकता है I हम अखबार पढ़ते है तो कोई हत्या कर रहा है,कोई बलात्कार तो कोई चोरी कर रहा है I ये सब देख कर हम सबसे पहले “मैं ” को तनावग्रस्त करते है I यदि हम धीरज से सोचें कि जिसकी जो प्रकृति है ,वो वैसा कर रहा है I हम तनावग्रस्त होंगे तब भी जो जैसा होना है वैसा ही होता रहेगा I हां यदि हम आनंदमयी और उर्जावान रहे तो किसी समस्या के हल में सहायता कर सकते है I जहां जहां भूकंम्प आने है ,वहाँ आयेंगे I ये ईश्वर की प्रकृति है ,हम किसी भी घटना को रोक नहीं सकते तो क्यों इस अनमोल जीवन के एक पल को भी तनावग्रस्त बनाते है ?

अपने आपको सिर्फ हम खुद खुश रख सकते है-

अपने लिए प्रकाश का दिया खुद बनो क्योंकि खुद को ही आगे जाना है I प्रसन्नता और दुःख ,दोनों से बेअसर हो जाओ I अपनी रचना का समय याद करो , उस समय हम केवल शांत और आनन्दमय थे I प्रसन्नता या ख़ुशी शरीर से नहीं ढूंढी जाती बल्कि प्राकृतिक तौर पर हमारी आत्मा में होती है I उसको हर पल अनुभव करना है I किसी दूसरी बात से प्रसन्नता अनुभव करेंगे तो दुःख भी अनुभव करेंगे I ईश्वर की एक शांत और आनंदमय रचना बन कर जीवन जिओ I

“Häβëëβ”




1 Comment

vikas sharma · April 20, 2018 at 1:52 pm

mein khud prakriti say pyar karta hoon.. dost bhi Kai bar keh detay hain ki tu paglon Jaisi bat karta hay kya kabhi in pedon say bat ho sakti hay.. magar mein janta hoon ki insay dil say bat Karo to yeh aapki mushkilon ka bhi hal nikal saktay hain…… so sweet of you

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