जीवन में जब सब कुछ नकारात्मक होने लगे

sakaratmak soch


                                               जीवन में जब सब कुछ नकारात्मक होने लगे I आप ऐसी दशा में हो कि जब उस पल में आपके जीवन में जब सबकुछ गलत हो रहा हो।आपको ऐसा लगने लगे कि बुरी किस्मत और दुःख की की हर तरफ से आपके ऊपर बौछार होने लगी है  जीवन चक्र नियंत्रण से बाहर हैं और आप अपनी साँसें भी आपके बस से बाहर होने लगी है । प्रभु की रचना के तौर पर आपके अन्दर एक डिफ़ॉल्ट गुण है ,सकारात्मक कंपन बनाए रखने की शक्ति का I लेकिन जैसा कि आप चारों ओर देखते हैं, आप सोचते हैं, “मेरे आस-पास की हर चीज सोच से परे हो रही है, तो मैं सकारात्मक कैसे रह सकता हूं?”  हम तनावग्रस्त क्यों रहते है

                     जिस स्थिति का हम सामना कर रहे हैं वह समस्या नहीं है। समस्या ये है कि हमें रब का दिया हुआ आशावाद और भरोसे को ये नकारात्मक सोच मार डालती है I तभी हताश लोग बोलते है, दर्द, भय, और सभी सभी दुःख के कारण जबरदस्ती अपनी अंतरात्मा से में  खो देते है और कीमती जिन्दगी की सकारात्मकता को भूल जाते है , प्रभु पर भरोसा भूल जाते है I

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                                                              जब हम जज्बातों से बुरी तरह अभिभूत होते हैं, तो हम अपनी उस छिपी हुई शक्ति से डिस्कनेक्ट हो जाते हैं। जब हम ‘गलत’ पर हमारा पूरा ध्यान केंद्रित करते हैं, तो कायनात भी हमें और अधिक गलत संकेत भेजना जारी कर देती है I ये रब का क़ानून है , जो सिर्फ़ उस पर भरोसा रखने वालों का ही साथ देता है I सकारात्मक सोच भरोसे से आती है I



                                                 हमारी रचना कुछ इस तरह की है कि हम गलत करेंगे या गलत सोचेंगे तो हमारे साथ गलत ही गलत होगा I मालिक का सिस्टम हमें हमारा साथ वैसे ही देता है , जैसे हम चलते है , वो बस हम जो करते है ,उसका बदला देता रहता है I इस तरह भला या बुरा जो भी होता है , हमारा खुद का किया हुआ होता है I  एक बच्चे की तरह खुश रहो

                                                  अच्छी बात ये है कि हमारे पास दिलों दिमाग में वो ताकत है कि हम अपनी नकारात्मक सोच को सकारात्मक सोच में बदल सकते है I मालिक हमें मौका देता है ,अपने आपको बदलने का ,जब भी हम चाहे I अपने आपको बदलने की और जिन्दगी को खुशनुमा बनाने की ताकत हमारे अन्दर छुपी हुई है I उस ताकत का इस्तेमाल करे तो बेहतर परिणाम मिल सकते है I

क्या हमारे पास जोखिम लेने और सफलतापूर्वक हमारी चुनौतियों को बदलने की इच्छाशक्ति है ?

यह आसान है। अपने मौजूदा हालत से एक क़दम पीछे हो जाओ और और अच्छी तरह समझने की कोशिश करो I थोड़ा दूर से अपनी उस हताश हालत पर गौर करो I इससे से हमें मदद मिलेगी कि हमें अपने आप में बदलना क्या है I इस दौरान निराशा और हताश जज्बातों को एक बार दरकिनार रखो तभी हम जिन्दगी में वो चीज़ें जोड़ पायेंगे , जो हम चाहते है I

इसके तरीके से, हम अपनी सकारात्मक ताकत को दुबारा पा सकते है I और जब हम ऐसी कोशिश करेंगे तो कायनात भी इसी रूप में हमारा साथ देने लगेगी I । जैसा कि हम देखते हैं कि हम क्या चाहते हैं, हम यह महसूस करना शुरू कर देते हैं कि यह एक नई वास्तविकता का अनुभव करने जैसा होगा। हमारा दिलों दिमाग निराशा को छोड़ आशावाद की ताकत नए सिरे से अनुभव करना शुरू कर देगा I   खुश रहने का सच्चा रहस्य




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हाँ। कुदरत जानती है है कि हमारे सकारात्मक क़दमों के साथ क्या करना है I

इस प्रक्रिया में, हम अपनी जिन्दगी के आने वाले दिनों के लिए एक बेहतर रास्ता बनाते है I

जानना अच्छा है: जब आप विपरीत परिस्थितियों से दुखी होकर अटक जाते है, असल में दुखी नहीं होते बल्कि हताश जज्बातों से आने वाला तूफ़ान हमें अटका देता है ,हम सकारात्मक उर्जा को भूल जाते है I

                                                  दूसरे शब्दों में, यह हमारी परिस्थितियों दर्द नहीं है; यह इस बात का दर्द होता है कि हम उस कुदरती ताकत से जुड़े हुए नहीं रहते है , जो हम में थी , हमारी रचना के वक़्त I उस प्राकृतिक ताकत से जुड़ते ही हमारे शरीर में सकारात्मक तरंगें उठने लगती है और कुदरती तौर पर हमारे काम सही होने लगते है I इन तरंगों की ताकत से ही हम फिर से उर्जावान जीवन जीना शुरू कर सकते है I ऐसा जीवन जिसको कोई भी नकारात्मक सोच रोक ना सके I

                                                                                     “Häβëëβ”

 


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