Adam (A.S) and Eve

The First Human Couple

 

be happy


Adam (A.S.) was created by God as the first human, in spite of that, angels praise and glorify the God well. Angels do not have the nature of disobeying as we have a lot. As we know that God is the Almighty. What He wants, He does. He does according to His will. We are all descendants of Adam (A.S.), created by one God The Almighty. In spite of this strong relation, we are killing and destroying each other !while all are out of the same root. and think we are following our religion !! The angels questioned whether the human would cause bloodshed and damage, but God told them that He knew what they did not. And this is a great truth that what God knows, we can never know. Everything or every command of our Creator is for our good and it is right.



                                                   God created the Heaven and Earth. If Adam (A.S.) did not make the mistake, then who would be on the Earth. Just I think only that God has trained us about sins and punishment by Adam (A.S) and Eve’ test, before sending them to Earth, Has the Devil Iblis become the cause of the existence of human on Earth? Could there be any existence of Ibis himself without the will of God?  Hundreds of thousands of trees, maybe in Heaven, there was only one tree among them whose fruit was forbidden. Who was the first to point out to that tree? The God Prepared the test for them that do not eat the fruit of it. We are weak human, we can not understand the Wisdom and power of God.




For a small mistake, Adam (AS) and Eve were separated for hundreds of years. Afterward, they were also forgiven. The first human was perfectly trained to live a good life without sins. Adam (A.S.) was the first human. He did not know much about sins and disobeying. We have got a lot of knowledge. We do the things first, that are forbidden to do. In India, there is no any legal problem to urinate anywhere. There is freedom of urination. If we write a warning on our wall that urination is not allowed here. People read this warning and decide to urinate there. They treat the warning as an invitation to do!
                                    God, The Almighty of the Universe give us some time to spend on Earth in good ways, loving and helping each other. Nowadays we are completely disobeying the orders of God, running opposite, destroying our peace and life. If we will not obey God, then this is not a problem for God, this is a problem for our life here and after.  Everybody wants to hate and kill in the name of religion!! The definition of religion is changed! Religious Babas and gurus also lose their ways.
                   The Lord gives wisdom to all of us. The fire of hell l is very painful, which is going to get from sins and injustice to others.



         humanity
    ढेर सारे फ़रिश्ते रब की तारीफ़ और इबादत में लगे हुए थे और सिर्फ़ वो ही काम करते थे ,जिसका रब हुक्म देता था I फ़िर भी रब ने इंसान को बनाया I वो जो चाहता है ,करता है I पूरी मानवजाति आदम (अ.स.) की संतान है , जो आजकल एक दुसरे को मार काट कर ज़न्नत में जाने की सोचते है या धर्म का पालन समझते है I जबकि सब एक ही जड़ से निकले हुए है I फरिश्तों ने रब को कहा था कि हो सकता है ये इंसान धरती पर जाकर सिर्फ़ खून खराबा या नुक्सान ही करेगा ,लेकिन रब ने उनको जवाब दिया कि जो मैं जानता हूँ ,वो तुम नहीं जानते I बिल्कुल सही बात है और हमारे रचियता की हर बात या हर हुक्म हमारे भले के लिए होता है और सही होता है I
रब ने धरती भी बनाई थी I अगर आदम (अ.स.) जन्नत में ग़लती ना करते तो धरती पर कौन बसता I लगता है ,रब ने ग़लती और उसकी सजा का अभ्यास इंसान को धरती पर भेजने से पहले करवा दिया I नहीं तो क्या शैतान इब्लिस धरती पर इंसान बसने का सबब बना ! रब की मर्जी के बिना क्या इब्लिस का खुद का कोई अस्तित्व हो सकता था ! हज़ारो, लाखों पेड़ होंगे शायद ज़न्नत में , उनके बीच बस एक ही वो पेड़ था जिसका फल खाना मना किया था I उस पेड़ की तरफ़ सबसे पहले इशारा किसने किया था I रब ने , कि उसका फल मत खाना I रब की क़ुदरत और हिकमत की गहराई को हम जैसे कमज़ोर इंसान एक ज़र्रा भर भी समझ नहीं सकते I
एक छोटी सी ग़लती के लिए आदम (अ.स.) और माँ हव्वा सैंकड़ो साल के लिए बिछड़ गए I बाद में उनको माफ़ भी किया गया I धरती पर भेजने से पहले इंसान को ग़लती ,उसकी सज़ा और दिल से तौबा करके माफ़ी मांगे तो माफ़ी मिलने का पूरा अभ्यास करवा दिया था रब ने I वो तो आदम (अ.स.) ,सृष्टि के पहले इंसान थे , उनको किसी पाप पुण्य का नहीं के बराबर ज्ञान था I हमें तो ढेर सारा ज्ञान हो चूका है I जिस काम के लिए हमें मना किया जाए, उसको सबसे पहले करते है I भारत में जैसे मूत्र विसर्जन की आज़ादी है , किसी दिवार पर लिख कर देखलो कि “देखो —– —— रहा है या यहाँ मूत्र विसर्जन मना है I पहले तो हमें महसूस भी नहीं हो रहा था ,लेकिन ये वार्निंग पढ़ते ही हमें हाज़त हो जाती है , इन मना करने वाली लाइनों को हम दावत देना समझते है कि यहाँ कर सकते है !



एक रचियता ने हमें कुछ वक़्त के लिए धरती पर भेजा और आजकल रब के तमाम हुक्मों के खिलाफ़ चल कर , एक दुसरे को मार काट ,बरबाद करके धर्म का पालन करने वाले इतने ज्यादा हो चुके है कि अधर्मी ढूंढना मुश्किल हो गया है I धर्म के आलिमों और बाबाओं के इतने ग्रुप हो चुके है , उनको ज्ञान के घमंड से ही फुर्सत नहीं मिलती और बस वो इतना सिखाते है कि तू चाहे धर्म पर बिल्कुल भी मत चल , बस दुसरे आलिम के कहने के मुताबिक़ मत चल !
मालिक हम सबको सद बुद्धि दे I नरक या जहन्नुम की आग बहुत बुरी है ,जो पापों और किसी दूसरे इंसान को तकलीफ़ पहुंचाने से मिलने वाली है I

        “Häβëëβ”   




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